Thursday, 3 September 2020

छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं पुरातात्विक स्थल



 

****छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं पुरातात्विक स्थल ****

छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों का विवरण निम्न है :-

 

 

*** चम्पारण्य ***

* यह महाप्रभु वल्लभाचार्य का जन्म स्थल  है।  वल्लभ सम्प्रदाय  के  प्रणेता  प्रसिद्ध  वैष्णव  संत  वल्लभाचार्य  का धाम  चम्पारण्य  रजिम  से  मात्र 9 किमी.  की दूरी  पर स्थित  है।  

* प्रतिवर्ष  माघ पूर्णिमा  में यहां  मेला लगता है।  आचार्य  वल्लभाचार्य  को समर्पित  मंदिर  के अतिरिक्त  यहां  एक पुराना  शिव  मंदिर भी है।  पुरातनता  के अतिरिक्त  मंदिर  में स्थापित  शिवलिंग  में क्रमशः  शिव -पार्वती  , गणेश  एक  साथ समाहित है। 






  **** सिरपुर ****

* यह एक ऐतिहासिक धार्मिक पुरातात्विक  स्थल है जो महासमुंद  जिले में स्थित है।  प्राचीन  काल में इसे श्रीपुर  तथा चित्रांगदपुर  के नाम से भी जाना जाता था।  इसे  समृद्ध  की  नगरी भी कहा जाता है। 

* इस  जिले को शरभपुरीय एवं पाण्डुवंशीय  शासको  की राजधानी  होने का श्रेय  प्राप्त  है। 

* बौध्द  ग्रन्थ  अवदान  शतक के अनुसार  महात्मा बुद्ध  यहा  आए  थे  तथा चीनी यात्री ह्वेनसांग  ने भी 639  ई.  में यहां की यात्रा की थी। 

* पाण्डुवंशीय  शासक हर्ष गुप्त  की पत्नी  वाटसा देवी  ने  यहां  लक्ष्मण मंदिर का निर्माण  कार्य  प्रारम्भ  करवाया  था ,जो महाशिव गुप्त  बालार्जुन  के समय  में  पूर्ण हुआ था।  इसके गर्भगृह  में भगवान  विष्णु  की प्रतिमा है। 

* यहां लक्ष्मण  मंदिर  के अतिरिक्त  आनंद  प्रभु  कुटी विहार , स्वास्तिक  बौद्ध   विहार  , गंधेश्वर  महादेव  मंदिर , तीवर  देव  विहार  तथा  बालेश्वर  महादेव  का मंदिर  प्रमुख  दर्शनीय स्थल है। 

* स्वास्तिक   बौद्ध  विहार  का संबंध   बौद्ध  धर्म  से है , यहां  भगवान  बुद्ध  की ध्यान  अवस्था  में निर्मित मूर्ति स्थापित है।  यहां प्रतिवर्ष  बुद्ध  पूर्णिमा  पर सिरपुर  महोत्सव का आयोजन  होता है। 

* आनंद  प्रभु कुटी  विहार , आनंद प्रभु  नामक  बौद्ध  भिक्षु द्वारा  निर्मित है।   गंधेश्वर  महादेव  मंदिर  का  जीर्णोद्धार  चिमणजी भोसले ने कराया था।




***** राजिम *****


* राजिम  को राज्य का महातीर्थ  माना गया है।  इसे राज्य  का प्रयाग  नाम से भी  जाना जाता है।   राज्य  की महत्वपूर्ण  और  धार्मिक आस्थाओं  से युक्त  यह स्थल  महानदी  ,पैरी एवं सोंढूर  नदियों  के संगम  पर स्थित है। 

* यहां  राजेश्वर  मंदिर , लोमेश  तथा  धौम्य  आश्रम  भी दर्शनीय है। 

* प्रतिवर्ष   माघ  पूर्णिमा को  यहां  एक बड़ा  मेला लगता है।  इस मेले में प्रतिवर्ष  बड़ी  संख्या में श्रद्धालु पर्यटक  पवित्र  महानदी में स्नान  करके  पुण्य  लाभ  उठाते  है। 

 

 

 

 

 

 

**** पाली *****

* यह ऐतिहासिक  स्थल कोरबा  जिले के अंतर्गत  स्थित है।  यहां जलाशय  के समीप  स्थित  प्राचीन  शिव  मंदिर  दर्शनीय  है।  यह  लगभग  एक हजार  वर्ष पुराना   मंदिर है , जिसे  बाण  वंश  के राजा  विक्रमादित्य  ने  9 वीं  सदी  में बनवाया  था।

 

 

***** आरंग *****

* यह  रायपुर  से संबलपुर  जाने वाले  राष्ट्रीय  मार्ग -53  पर  पूर्व  की ओर  स्थित  है। 

* यहां  ऐतिहासिक  पुरातात्विक महत्व  के अनेक  मंदिर  स्थित है , इसलिए  इसे  मंदिरो  का  नगर  कहा जाता  है। 

* यहां  से जैन  तीर्थकरो  की अनेक  प्रतिमाएं  प्राप्त  हुई  जिनमे नेमिनाथ  , अजितनाथ  व श्रेयांश  नाथ  की 7  फीट  ऊँची  ग्रेनाइट  पत्थर  की  मूर्तिया प्रमुख है।  

* ऐसी  जनश्रुति  है कि  मंदिर  में भाई - बहन  एक साथ  प्रवेश  नहीं  करते। 








***** कुनकुरी ****

 

* यह  रायगढ़ - जशपुर  राजमार्ग  पर   जशपुर  से लगभग  45 किमी.  पहले  कुनकुरी  स्थान पर  स्थित है। 

* यहां  अवस्थित  कैथोलिक चर्च  देश - विदेश  में प्रसिद्ध है ,  जो  कैथोलिक  ईसाइयो का पवित्र  स्थान है। 

* यहां  पर मनियारी नदी  व शिवनाथ नदी  के संगम  पर ईसाई  धर्म  का प्रसिद्ध  मेला लगता है।  


 

 

****** जांजगीर *****

* यह  हैहय  वंश के प्रसिद्ध  शासक  जाज्जवल्यदेव  द्वारा बसाई गई   नगरी है। 

* यहां  बारहवीं  शताब्दी  में निर्मित विष्णु  मंदिर  है ,  जो कल्चुरी  विष्णु  मंदिर  की  भांति  एक  प्राचीन  शिव  मंदिर है। 

 

 

 

 

 

 

 ***** शिवरीनारायण *****

 

* यह जांजगीर - चांपा  जिले में  स्थित है।   यहां  महानदी  , शिवनाथ  एवं  जोंक  नदी का  त्रिवेणी  संगम  है। 

* दंतकथाओं  के अनुसार  , राम  ने शबरी  के जूठे  बेर  इसी  स्थान पर  खाए  थे। 

 * शबरी  माता  नर - नारायण  मंदिर ,  चंद्रचूड़  का मंदिर एवं केवट  मंदिर  आदि  यही  पर स्थित  है। 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

****** रामगढ़ ******

*  बिलासपुर - अंबिकापुर  मार्ग पर क्रमशः  बिलासपुर  से 100  किमी.  तथा  अंबिकापुर  से 40 किमी.  की दूरी पर सरगुजा  जिले  में स्थित है।   किंवदंतियों  के अनुसार  यह   स्थान  रामगढ़  से जुड़ा है।  ऐसी  मान्यता  है कि  वनवास  के समय  राम , लक्ष्मण  और सीता  इस स्थान पर कुछ दिन ठहरे  थे। 

 

 

 

 

 

 

 

 

***** डीपाडीह ****

* इस अत्यंत  महत्वपूर्ण  पुरातात्वीय  स्थान  के चारो  ओर 1  किमी.  क्षेत्र  में  अनेकानेक  प्राचीनतम  मंदिरो के अवशेष विद्धमान  है।  

* इनमे  सामत  सरना , जो  वस्तुतः  एक  शिव मंदिर  है , अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

 

 

 

 

 

 

***** बारसूर ****

* छिंदक  नाग राजाओं  की राजधानी रहा  यह क्षेत्र  11 -12 वीं  शताब्दी  के मंदिरो  के लिए सुविख्यात  है। 

* मंदिर  में विध्न  विनाशक ( गणेश ) अपनी  विशालता  के लिए  प्रसिद्ध  है।  इसके साथ  ही  मामा - भांजा  मंदिर  तथा बत्तीसगुड़ी मंदिर  , देवराली  मंदिर  आदि भी विख्यात है। 

 

 

 

 

 

***** कबीरधाम *****

* कबीरधाम  ( कवर्धा ) में  मड़वा महल  एवं  छेरकी  महल  प्रमुख  ऐतिहासिक  पर्यटन  स्थल है।  कवर्धा  महल के मुख्य  प्रवेश  द्वार  को हाथी  दरवाजा  के नाम से जाना जाता है। 

 

 

 

 

 

 

 

 

***** मड़वा महल *****

* इसे शैव  मत  के वामाचार  , सम्प्रदाय का  प्रमुख केंद्र  मानते है।  

* इसका  निर्माण वर्ष  1349 ई.  में  फणिनागवंशी  शासक  रामचन्द्रदेव  ने  कराया था।   इसे दूल्हा  देव  भी कहते है , यह स्थान  विवाह का प्रतीक  माना जाता  है। 

 

 

 

 

***** छेरकी महल ****

* 13 -14 वीं   शताब्दी  में ईट  एवं प्रस्तर  से निर्मित  इस शिव  मंदिर  का पुरातात्वीय  महत्व है। 

 

 

   

***** पुजारी पाली *****

* आठवीं  शताब्दी  में सोमवंशीय  राजाओं  के शासनकाल  में ईंटो  द्वारा  निर्मित  पुजारी  पाली स्मारक  भारतीय  स्थापत्य  कला का  अनुपम उदाहरण है।  

* इन जीर्ण - शीर्ण  स्मारकों  में गोपाल  मंदिर  तथा केवटिन मंदिर प्रमुख है।

 

 

 

 

 

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