Friday, 7 August 2020

छत्तीसगढ़ के प्रमुख मेले , Fairs of chhattisgarh, chhattisgarh ke mele , cgpsc

****छत्तीसगढ़ के प्रमुख मेले ***

राज्य के विभिन्न पर्वो पर  अलग -अलग  स्थान पर मेलो का आयोजन  किया जाता है।  राज्य के प्रमुख  मेलो का विवरण निम्न है :-

*****माघ  पूर्णिमा  के मेले *****

* राजिम मेला ,यह  राज्य के विशालतम  मेलो  में से  एक है।  यह मेला माघ पूर्णिमा से प्रारम्भ होकर  शिवरात्रि तक  आयोजित किया जाता है।  यह मेला लघु कुम्भ का रूप है  जो  श्री  राजीव लोचन  कुम्भ के नाम से  भी जाना जाता है।  

 * शिवरीनारायण  का मेला ,यह जांजगीर -चांपा  के शिवरीनारायण  में आयोजित किया जाता है।  यह मेला महाशिवरात्रि  तक  आयोजित किया जाता है।   इस मेले  में  रामनामी , निषाद ,देवार  , अघरिया ,पटेल  और मरार  जाति  समाज की वार्षिक पंचायत  भी आयोजित  की  जाती है।  

* दामाखेड़ा  एवं  कुदुरमाल  मेला ,ये  मेले  कबीरपंथी  में आयोजित  किए  जाते है।  

* सिरपुर  का मेला , यह मेला माघ  पूर्णिमा  से शिवरात्रि  तक महासमुंद  के सिरपुर  में आयोजित  किया जाता है। माघ  पूर्णिमा के  अवसर पर आयोजित  अन्य  प्रमुख मेले  चम्पारण्य  (रायपुर ) ,प्राणेश्वर (रायपुर ) तथा  मल्हार  का मेला है।  

 

 

 

****रामनवमी  के मेले *****

 * चैत्र माह ( मार्च -अप्रैल ) में राम  नवमी के अवसर  पर छत्तीसगढ़  में डभरा का मेला ( जांजगीर -चांपा ), डोंगरगढ़  का मेला (राजनांदगांव ) ,खल्लारी  मेला ( महासमुंद ) , भोरमदेव  का मेला ( कबीरधाम ) , रतनपुर  का मेला ( बिलासपुर ) , चंद्रपुर  का मेला ( जांजगीर -चांपा ) आदि  आयोजित  किए जाते है।  

 

 

****पौष  पूर्णिमा  के मेले ****

* पौष  पूर्णिमा  के छेरछेरा  पर्व  पर तुरतुरिया ( बलौदाबाजार ) ,सगनी  घाट (अहिवारा ) , चरौदा  ( धरसीवां ) ,गोर्रइया (मांदर ) में मेलो  का आयोजन  किया जाता है।  

 

***मड़ई  मेला ****

* मड़ई  मेला  मुख्य  रूप से गोण्ड  जातियों  द्वारा  आयोजित किया जाता है। 

* बस्तर  में विभिन्न  स्थानों पर  मड़ई मेलो का  आयोजन किया जाता है , इसलिए  बस्तर को मड़ई का संसार भी कहते है।  

* मड़ई  मेलो  में आदिवासी संस्कृति  की अनेक  कलाए  देखने  को मिलती है।   पूर्णिमा  को  आयोजित  रनबौर की मड़ई , कार्तिक  पूर्णिमा  को  आयोजित  करिया धुरवा  की  मड़ई  और  राउताद्री  मड़ई  प्रमुख  मड़ई  मेले  है।  

*इस  मेले  का आयोजन  नारायणपुर , दंतेवाड़ा ,  कांकेर , राजनांदगांव  एवं दुर्ग  में भी  होता है।  

 

        

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