Wednesday, 5 August 2020

छत्तीसगढ़ के प्रमुख त्यौहार एवं पर्व , Festival of chhattisgarh, chhattisgarh ke tyauhar , cgpsc



******छत्तीसगढ़ के प्रमुख त्यौहार  एवं पर्व ******




छत्तीसगढ़ के त्यौहारों का विवरण निम्न  हैं :-

 

 

छेरछेरा ******

* यह त्यौहार /पर्व  पौष माह की पूर्णिमा के दिन  मनाया जाता है।  इस अवसर पर बच्चे  नई फसल के धान मांगने निकलते है।  

 

 

 

 

धेरसा ******

* यह पौष माह  जनवरी  में कोरबा आदिवासियों  द्वारा उत्तरा (सरसो ,दाल  आदि ) की फसल काटने पर मनाया जाने वाला उत्सव है।  

 

 

मेघनाद ******

* फाल्गुन  माह (मार्च -अप्रैल ) में गोण्ड जनजाति के द्वारा यह पर्व मनाया जाता है।  रावण के पुत्र मेघनाद   को गोण्ड जाति का सर्वोच्च  देवता मानते है ,और इसकी पूजा करते है।

 

*आदिवासी  मेघनाद    के प्रतीक  के रूप में मेघनाद  खम्भ (पांच खम्भों का ) बनाते है। इस पर्व को गोण्ड जनजाति  आपदाओं पर विजय पाने का प्रतीक मानती है।  

 

 

 

नवरात्रि *******

* माँ  दुर्गा  की उपासना  का यह पर्व चैत्र  (मार्च -अप्रैल ) एवं आश्विन  (सितंबर -अक्टूबर )  दोनों माह में 9 -9  दिन तक मनाया जाता है।  

* इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के दंतेश्वरी  (बस्तर व दंतेवाड़ा ) ,बम्लेश्वरी  (राजनांदगांव ) , महामाया ( बिलासपुर ) आदि शक्तिपीठो  पर विशेष पूजन होती है।  

 

 

 

 

 

 

सरहुल ******

*  चैत्र माह (मार्च -अप्रैल ) के  प्रारम्भ में साल  वृक्ष में फूल  आने पर  यह त्यौहार  उराव  जनजाति  द्वारा मनाया जाता है।  यह  त्यौहार  सरगुजा  क्षेत्र  में धूमधाम  से मनाया जाता है।  

 

* इस अवसर   पर प्रतीकात्मक  रूप से  सूर्य  और पृथ्वी का  विवाह रचाया जाता है तथा मुर्गे की बलि दी जाती है।  

 

 

 

 

 

अक्ति (अक्षय तृतीया  )*******

* इसका  आयोजन  बैशाख  माह (अप्रैल -मई ) की शुक्ल पक्ष  तृतीया  को  किया जाता है।  

* इस पर्व के अवसर पर लड़कियाँ पुतला -पुतली का विवाह रचाती है।  इसी दिन  से  खेतो में  बीज बोने  का  कार्य  प्रारम्भ  होता है।  इसे अक्खा तीज  भी कहा जाता है।  

 

 

करमा ******

* उराँव  एवं सरगुजा  संभाग  की  जनजातियों  द्वारा  मनाया जाने वाला  यह त्यौहार  मुख्यतः  हरियाली  आने की खुशी  में  मनाया जाता है।   यह  पर्व  भाद्र  माह में  मनाया  जाता है।  

* इस  अवसर पर करमा  नृत्य  का आयोजन  होता है।  

 

 

 

 

 

 

गोंचा *******

* बस्तर  में आषाढ़  माह (जून - जुलाई ) में दशहरे के अवसर पर  यह  पर्व मनाया जाता है।  यह मुख्य  रूप से  जगदलपुर  में मनाया जाता  है।  

* इस दिन  लोग  श्री  जगन्नाथ  मंदिर  में स्थित  मूर्तियों  को सम्मानपूर्वक  रथ  में  रखते है।  इसके  पश्चात  इस रथ को  9 दिनों तक घुमाया जाता है  तथा 10  वें  दिन  मूर्तियों  को पुनः  मंदिर में स्थापित कर दिया जाता है।  

 

 

हरेली ******

* यह किसानों  के द्वारा  मनाया जाने वाला  पर्व है।  इस पर्व पर श्रावण   माह ( जुलाई - अगस्त )  की अमावस्या  को सभी  कृषि  एवं  लौह  उपकरणों की पूजा की जाती है।  

* इस पर्व  को राज्य  में गेंड़ी  पर्व भी कहा जाता है।  इस दिन  बांस की   गेंड़ी  बनाकर  बच्चे  घूमते  व नाचते है।  इस दिन  जादू -टोने  की  भी  मान्यता है।  

 * इस  अवसर पर राउत  जातियां  नीम की टहनियां  तथा लोहार  जाति  के लोग  लोहे की पाती  घर के दरवाजे पर लगाते  है।               

 

 

 

 

 

 

नाग पंचमी *******

* श्रवण माह (जुलाई - अगस्त ) की शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन इसका आयोजन  किया जाता  है।  इस दिन सांप  को दूध  पिलाया जाता है। 

* इस  दिन दहला पहाड़ ( जांजगीर - चांपा ) में मेला लगता है तथा  कुश्ती  खेल का आयोजन होता है।  

 

 

 

 

पोला पाटन *******

* भाद्र माह ( अगस्त - सितंबर )  में कृषको  द्वारा मनाए जाने वाले इस त्यौहार  में  मिट्टी  के  बैल और पोला  बनाए जाते है।  

* बैलो को  सजाकर बैल दौड़  प्रतियोगिता  भी आयोजित की  जाती है।  

 

 

 

 

 

 

 

हल षष्ठी(कमरछठ ) *******   

* इसका आयोजन  भाद्र माह ( अगस्त - सितंबर ) के  कृष्ण पक्ष की षष्ठी  को किया जाता है।   

* इस  पर्व में छत्तीसगढ़ी   माताएँ  अपने पुत्र  की लम्बी  आयु के लिए व्रत रखती हैं।   इसमें  माताएं  शिव - पार्वती  की पूजा  करती है।

 

 

 

 

 

तीजा ( हरित तालिका )******

* यह  छत्तीसगढ़ का परम्परागत त्यौहार है।   इस त्यौहार के अवसर पर  भाद्र माह ( अगस्त - सितंबर ) में माता -पिता  अपनी विवाहित  लड़कियों को ससुराल से मायके  लाते हैं।  

* तीजा  में स्त्रियाँ  निर्जला  उपवास  रखती है।  दूसरे दिन स्त्रियां  शिव - पार्वती  की पूजा  -अर्चना  के पश्चात  अपना उपवास  खोलती है।  

 

 

कोरा ******

* यह कोरबा आदिवासियों  द्वारा  कुटकी , गोंदली  की फसल  काटने भाद्र  माह ( अगस्त -  सितंबर )  के बाद मनाया जाने वाला उत्सव है।  

 

 

 

दशहरा *****

* प्रदेश का यह प्रमुख त्यौहार  आश्विन  मास ( सितंबर - अक्टूबर ) में शुक्ल  पक्ष की  दशमी  में रावण  पर राम की विजय  के प्रतीक  के रूप में मनाया जाता है।  इसमें  दंतेश्वरी  की पूजा की जाती है।  

* बस्तर  का  दशहरा  छत्तीसगढ़  में काफी  प्रसिद्ध है।  यह 75 दिनों तक चलता  है। 

 

 

 

 

दीपावली ******

*  देश में अन्य राज्यों की भाती  यहां भी  दीपावली  पर्व की  कार्तिक  माह ( अक्टूबर -नवंबर ) में  धूमधाम से मनाया जाता है।  इस त्यौहार में लक्ष्मी का  पूजन कर दीप जलाये  जाते है।  यह पर्व भगवान राम की आयोध्या  वापसी की खुशी  में मनाया जाता है।  

 

 

 

गोवर्धन पूजा ******

*  इस पर्व का आयोजन  कार्तिक माह ( अक्टूबर - नवंबर ) में दीपावली के दूसरे दिन किया जाता है।  यह पूजा  गोधन की समृद्धि की कामना  से की जाती है।  राज्य में  इस अवसर पर गोबर  की  विभिन्न  आकृतियाँ  बनाकर   उसे  पशुओं  के खुरो से कुचलवाया   जाता है।  

 

 

 

 

नवाखानी *******

* नई  फसल से अनाज  प्राप्ति  के  उपलक्ष्य में कार्तिक  माह  ( अक्टूबर -नवंबर ) में दीपावली  के बाद  बस्तर  में मनाए  जाने वाले  इस पर्व  में  गोण्ड  अपने पूर्वजो  को नया  अनाज  और  मदिरा  चढ़ाते  है।  इस  त्यौहार  के बाद  ही आदिवासी  लोग  नई फसल  को  प्रयोग में लाते है।  

 

 

 

 

दियारी ******

*  यह त्यौहार  कार्तिक माह ( अक्टूबर - नवंबर )  में दीपावली के दूसरे दिन सुबह बैलो को खिचड़ी  खिलाकर  मनाया जाता है।  

* यह माड़िया जनजातिय द्वारा  मनाया जाता है।  बस्तर में यह  विधि - विधान  से फसल  की पूजा कर मनाया जाता है। 

 

 

 

 

माटी  तिहार *******

* कार्तिक  माह ( अक्टूबर - नवंबर )  में दीपावली के पश्चात बस्तर में  यह  त्यौहार   मनाया जाता है, जिसमे पृथ्वी  पूजा की जाती है।  

* इस  पर्व को  बीजपुटनी  पर्व भी कहते है।  

 

 

 

मातर *****

*  यह कार्तिक  माह ( अक्टूबर - नवंबर )  में  छत्तीसगढ़ के अनेक हिस्सों  में दीपावली के तीसरे दिन  मनाया जाने  वाला  एक  मुख्य  त्यौहार  है।  यह  राउत जाति  तथा यादव समुदाय में  मुख्य  रूप से  मनाया जाता है।  

* इस दिन  ये लोग  लकड़ी  के बने  अपने  कुल  देवता  अर्थात खोडहर    देव की पूजा - अर्चना  करते है।  

* राउत  समुदाय  के लोगो द्वारा  इस अवसर पर  पारम्परिक  वेशभूषा  में रंग - बिरंगे  परिधानों में लाठिया  लेकर  नृत्य  किया जाता है।  

 

 

 

बीज  बोहनी *******

* यह  कोरबा  जनजाति का  महत्वपूर्ण  पर्व है।  ये  लोग  कृषि  के दौरान   इस पर्व  को काफी  उत्साह से  मनाते है।  

 

 

 

 

करसाड़  पर्व ****** 

*  अबुझमाड़िया  आदिवासियों  के प्रमुख पर्व  में अविवाहित  युवक - युवती  अपने  जीवनसाथी  का चुनाव करते है।  

 

ककसार *****

* इस पर्व पर गाए  जाने वाले गीत  को ककसारपाटा कहते है।   इस पर्व पर  मुड़िया  जनजाति  कसार   नृत्य  करती है।   तथा अपने  घोटुल  युवागृह  के देवता   लिंगोपेन   की  पूजा - अर्चना  करती है।  




 

 

 

आमा  खाई ******

*  छत्तीसगढ़  की गोण्ड  जनजातियां  आम  का फल   लगने  के  समय  पर यह  त्यौहार  मनाती है।  

 

 

 

                          

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