Tuesday, 11 August 2020

छत्तीसगढ़ का भौतिक परिदृश्य , Physical landscape of chhattisgarh , bhautik pridrisya , cgpsc

*****छत्तीसगढ़ का भौतिक परिदृश्य******


छत्तीसगढ़ राज्य  में धरातलीय  विषमताएं  अधिक मिलती है।  छत्तीसगढ़ का आंतरिक  भाग   सपाट  मैदान है  तथा  इसके चारो ओर सभी दिशाओं में ऊँची उठी  भू - स्थलाकृतियां  मिलती है।   छत्तीसगढ़ को  मुख्यतः  निम्न   चार  भौतिक  प्रदेशो  में विभाजित  किया  जाता हैं  :-

1 .  मैदानी  प्रदेश 

2.   पहाड़ी  प्रदेश 

3.   दण्डकारण्य पठार 

4.   पाट  प्रदेश 

 

 

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          ***** 1.  मैदानी  प्रदेश *****

 

* छत्तीसगढ़  में महानदी  के तटीय   भाग को  मैदानी  प्रदेश कहते है।  मैदानी  प्रदेश के  अंतर्गत  छत्तीसगढ़ का मैदान  ,बस्तर का  मैदान ,  कोटरी का मैदान  , कोरबा  का मैदान  , हसदो का मैदान , रामपुर का  मैदान  , सरगुजा का  मैदान  , रिहन्द का मैदान  तथा  कन्हार का मैदान  को  सम्मिलित  किया गया  है।   प्रदेश  के मैदानों का वर्णन  इस प्रकार है  :-


  

***छत्तीसगढ़  मैदान या  महानदी  बेसिन ***

* छत्तीसगढ़ राज्य में महानदी बेसिन को छत्तीसगढ़ मैदान  भी  कहा जाता है।   

* यह मैदान राज्य के लगभग 50 % भाग  में फैला हुआ है।  इसका कुल  क्षेत्रफल  68 , 064  वर्ग किमी.  है।  

* इस मैदान का निर्माण  कड़प्पा  शैल समूह के क्षैतिज  अवसादी  शैलो  पर महानदी  तथा सहायक  नदियो  के  अपरदन  के  फलस्वरूप  हुआ है।  

* यह  मैदान छत्तीसगढ़  राज्य  का हृदय  स्थल  तथा धान का कटोरा   भी कहलाता है।  

* इस क्षेत्र  में औसत  वर्षा  125 सेमी.  के मध्य होती है। 

* यह क्षेत्र  लौह - अयस्क  , एस्बेस्टस  , चूना  - पत्थर  ,बाक्साइड  आदि  खनिजों  की  दृष्टि  से अधिक सम्पन्न  है।  

* यह क्षेत्र  कांसा  उत्पादन  के लिए  भी  प्रसिद्द  है।  

*  इस क्षेत्र  के अंतर्गत  रायपुर  , दुर्ग  , राजनांदगांव  , रायगढ़  का सम्पूर्ण  भाग एवं बिलासपुर  जिले का कुछ  भाग  सम्मिलित है।  

* इस  सम्पूर्ण  क्षेत्र  में लाल  - पीली  व  जलोढ़  मिट्टी पाई  जाती है।  इस  क्षेत्र के तिल्दा  व भाटापारा  क्षेत्र  चावल उद्योग के लिए राष्ट्रीय  स्तर पर  विख्यात है।  

 

* छत्तीसगढ़ का  मैदान दो उप - विभागों  में विभाजित  किया जाता है:-

१.  दुर्ग  - रायपुर  मैदान --दुर्ग -रायपुर मैदान  छत्तीसगढ़ मैदान  का दक्षिण भाग  है।  यह  भाग  शिवनाथ  एवं महानदी  अपवाह  क्षेत्र में आता  हैं।  इसकी ढाल  उत्तर की  ओर  है।  इस न मैदान की आकृति  पंखाकार है  तथा मैदान का विस्तार रायपुर  , बलौदा -बाजार   , बेमेतरा  , दुर्ग  , संजारी  , बालोद  , राजनांदगांव  तथा  धमतरी  जिलों  तक है।  

 

२.   बिलासपुर  - रायगढ़  मैदान -- छत्तीसगढ़  मैदान के उत्तरी भाग   में इस क्षेत्र  का विस्तार   है।  इस मैदान का विस्तार तीन जिलों  बिलासपुर  , जांजगीर -चाम्पा   व  रायगढ़  में है।  

 * शिवनाथ  तथा  महानदी  इसकी  दक्षिणी  सीमा बनाती है।  इसका उत्तरी भाग  उच्च  भूमि से घिरा  हुआ तथा खंडित  है।   इस  मैदान  का ढाल   मंद  एवं  दक्षिण की ओर  है।  

* इस मैदान  का सबसे ऊँचा  पहाड़  दहला पहाड़ (760 मी. )  है , जो अकलतरा  , जांजगीर - चाम्पा  में स्थित है।   इस मैदान  को तीन  उप - विभागों  से  बांटा  गया है  जो क्रमशः  हसदों  -मांड  का  मैदान  , बिलासपुर  का मैदान  व रायगढ़  का मैदान है।  

 

 

****बस्तर का मैदान ****

 

* बस्तर का  मैदान  छत्तीसगढ़ राज्य  के दक्षिणी  सीमान्त  क्षेत्र   में है।  य गोदावरी  तथा  उसकी  सहायक  सबरी  नदी  का  मैदान  है।  

* इस मैदान का विस्तार  सुकमा  और बीजापुर  जिलों  में है।   इसकी समुद्रतल से ऊंचाई  150 - 300  मी.  के  बीच  एवं  चौड़ाई  लगभग  25 किमी.  है।  इसका निर्माण  ग्रेनाइट  तथा  नीस  शैलो  से हुआ  है।  

               

१.  कोटरी का मैदान --  इस मैदान  का विस्तार  दक्षिण - पश्चिमी  सीमान्त  क्षेत्र  में है , जो कांकेर  जिले के  पंखाजूर   , भानुप्रतापपुर  एवं  राजनांदगांव  जिले  के दक्षिणी  मोहेला  तहसीलों  में विस्तृत है।  

 

२.  कोरबा  का मैदान -- * यह मैदान छत्तीसगढ़ राज्य  के उत्तर  - मध्य  में दक्षिणी  कटघोरा  एवं  दक्षिणी कोरबा  तहसीलों में विस्तृत है।  

* कोरबा  मैदान ( बेसिन ) पश्चिम में पेंड्रा  के पठार  तथा  पूर्व में  छुरी  पहाड़ियों के  बीच  स्थित है।   यह  200  वर्ग  किमी.  में फैला है।  

 

३.  हसदो -रामपुर का मैदान -- * राज्य के उत्तर में हसदो - रामपुर  बेसिन  स्थित है।  इसके  अंतर्गत उत्तरी  कटघोरा , पूर्वी  पेंड्रा  तथा  दक्षिणी  मनेन्द्रगढ़ सम्मिलित है।  

* एकाकी  अपरदन  अवरोध  पहाड़ियां इस  मैदान में अनेक  स्थानों पर  दिखाई देती है।   इसमें  दक्षिण की मुख्य  नदी हसदो है।  

* बेसिन  के दक्षिण में पेंड्रा  पठार  एवं छुरी की पहाड़ियां स्थित है ,  जबकि उत्तर  में कोरिया  की  पहाड़ियां  स्थित है।  

 

४.  सरगुजा  का मैदान --- * सरगुजा  बेसिन देवगढ़  तथा मैनपाट -छुरी  पहाड़ियों से घिरा  है।  इसकी औसत  ऊंचाई  450 मी.  है। इस  बेसिन के दक्षिण -पूर्व  में  मैनपाट  , जारंगपाट  , सामरीपाट  , जशपुरपाट   अवस्थित है।  

* यह प्रदेश  के उत्तर - मध्य  क्षेत्र  में आता है।  इसका विस्तार  सरगुजा जिले में अंबिकापुर  , दक्षिणी  भानुप्रतापपुर  और सीतापुर  तहसीलों  में है।  

* इस क्षेत्र में रामगढ़ की पहाड़ी स्थित है।  

 

५. रिहन्द का मैदान  --- * यह मैदान राज्य की उत्तरी सीमा  पर स्थित है  तथा गंगा  अपवाह तंत्र  का भाग है। 

*  इसका बेसिन देवगढ़  की पहाड़ियों के  ठीक  उत्तर तथा कन्हार  बेसिन के पश्चिम  में अवस्थित है। 

* यह  वाड्रफनगर  , बलरामपुर  तक विस्तृत है। इसकी  औसत  ऊंचाई  300 -450 मी.  है।  इसे  सिंगरौली बेसिन भी कहा जाता है।

 

६.  कन्हार  का  मैदान --- * यह मैदान राज्य के उत्तर -पूर्वी  सीमान्त  क्षेत्र  में  अवस्थित है।  यह  सरगुजा  जिले  की  रामानुजगंज  तहसील में आता है। 

 

 

 

                   

                     ***** 2.  पहाड़ी  प्रदेश  ******

 

( पूर्वी  बघेलखंड  का पठार )

* बघेल खंड  पठार  मुख्यरूप से मध्यप्रदेश की उत्तर-पूर्वी  सीमा में स्थित है , परन्तु  इसका  पूर्वी भाग  छत्तीसगढ़ राज्य  के  अंतर्गत  आता है।  

* पूर्वी  बघेलखण्ड  के पठार  में बघेलखण्ड  पठार  का पूर्वी  भाग  तथा  छोटानागपुर  पठार  का भाग  सम्मिलित है।  

* यह पठार  गंगा एवं  महानदी के मध्य  जल  द्विभाजन का  दक्षिणी  भाग  है।  

* इसके अंतर्गत  सूरतपुर , कोरिया ,सरगुजा  ( मैनपाट  व सीतापुर तहसील के  अतिरिक्त ) तथा  बलरामपुर  ( सामरी  व  कुसमी तहसील  के अतिरिक्त ) जिले सम्मिलित  है। 

*  भू - गर्भिक  संरचना  में  विभिन्नता  तथा  नदियों  के अपरदन  के फलस्वरूप  उच्च  भू -भाग  अनेक  पहाड़ियों एवं  श्रेणियों  में विभाजित  है।  जिनका  विवरण  इस प्रकार है :-


***** मैकाल  श्रेणी  ******

 * इस श्रेणी का विस्तार  राजनांदगांव  , कवर्धा   ,लोरमी  एवं पेंड्रा  तक है।  यह सतपुड़ा  पर्वत  श्रृंखला  का भाग है।  

* मैकाल  श्रेणी का ढाल  पश्चिम से पूर्व की ओर  है।  इसकी  औसत  ऊँचाई  700 - 900  मी.  है।  

बदरगगढ़  चोटी (1176  मी. ) इस श्रेणी  की सबसे ऊँची चोटी है। 

*  मैकाल  श्रेणी  के कारण  कबीरधाम  जिला  वृष्टिछाया  के अंतर्गत आ जाता है।  

*  यह श्रेणी  शिवनाथ  व वेनगंगा  नदियों  के मध्य  विभाजक  का कार्य करती है। 

 

****** रामगढ़  की पहाड़ियां ******

* ये  पहाड़ियां  सरगुजा जिले में  स्थित है तथा  यह सतपुड़ा  पर्वत  श्रृंखला का भाग है।  

*  यहां  पर जोगीमारा  , लक्ष्मणबेंगरा  , सीताबेंगरा  नामक गुफाएं  है।  

*  रामगढ़ में ही कालिदास  ने मेघदूत की रचना  की थी।  मेघदूत  का अनुवाद  छत्तीसगढ़ी  भाषा  में मुकुटधर पांडेय द्वारा  किया  गया। 

* जोगीमरा  गुफा  में देवदत्त  नर्तक तथा देवदासी  नृत्यांगना  की प्रेमगाथा  का वर्णन  है।  

 

****** छुरी  - उदयपुर की  पहाड़ियां *****

* छुरी - उदयपुर  की पहाड़ियां  छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तर - पूर्वी  भाग में कोरबा , सरगुजा , रायगढ़  तक विस्तृत है।  

* इनकी  औसत  ऊंचाई  600 -900  मी.  है।  मांढ  नदी इन्हे उदयपुर की  पहाड़ियों  से  पृथक  करती है।  ये पहाड़ियां रिहन्द  नदी का उद्गम  स्थल है।  

 

**** चांगभखार  - देवगढ़  की पहाड़ियां ****

* चांगभखार - देवगढ़  की पहाड़ियां  राज्य के उत्तरी  भाग  में स्थित है।  यह  पूर्वी  बघेलखण्ड  पठार  एवं कैमूर  श्रृंखला का भाग है। 

* इनका विस्तार  जनकपुर ,बैकुंठपुर , मनेन्द्रगढ़  , सूरजपुर  ,  भानुप्रतापपुर  , अंबिकापुर  , कुमसी  , कोरिया  एवं  रामानुजगंज  आदि  तहसीलों  में है।  

* ये शिवनाथ  - वेनगंगा  के मध्य  विभाजक  पर्वत  का कार्य करती है।  

* इनकी ऊंचाई  समुद्रतल से  600 -1000  मी.  तक  है।  इन   पहाड़ियों में  सर्वाधिक  ऊँची  चोटी  देवगढ़  ( 1033  मी. ) है।  

* इन पहाड़ियों  में बलुआ  पत्थर  की अधिकता है। 

 

 

 

                ***** 3.  दण्डकारण्य  पठार  *****

 

*  यह पठार राज्य के दक्षिणी  भाग  में स्थित  है।  इस पठार का क्षेत्रफल  39060 वर्ग किमी.  है।  

* राज्य  में इस  पठार  का विस्तार  सुकमा , बस्तर  , बीजापुर  , दंतेवाड़ा  , नारायणपुर  , कोंडागांव , कांकेर  एवं राजनांदगांव  ( मोहेला  व मानपुर  तहसील ) जिलों में है।  

* इस पठार की अधिकांश भूमि  पर  वन  फैले  हुए  है।  इसके बस्तर  क्षेत्र  को  साल  वनों  का द्वीप  कहा जाता है। 

* इस  क्षेत्र  में गोंड  आदिवासी  अधिकता  में निवास  करते है , इसलिए  इसे गोण्डो  की भूमि  भी कहा जाता है।  

* दंडकारण्य  पठार  में लाल  बलुई  मृदा  पाई  जाती है। 

* इस  क्षेत्र  में गढ़िया  पहाड़  ( जिला - कांकेर ) स्थित  है,  जहां  पर गढ़िया  महोत्सव  भी मनाया जाता  है। 

 

इस क्षेत्र  के प्रमुख पठारों  का विवरण  इस प्रकार है :-

 

 

 

**** पेंड्रा - लोरमी  पठार *****

* पेंड्रा -लोरमी  पठार  छत्तीसगढ़ प्रदेश  के बिलासपुर  जिले  की लोरमी  और मुंगेली  तहसीलों  तथा कोरबा  जिले की पाली  तहसील  में विस्तृत  है। 

 *  मनियारी  और अरपा  नदी का उद्गम  केंद्र  यहीं है।  

*  पलमागढ़  चोटी (1080 मी. )  तथा लाफागढ़  (1048  मी. ) चोटी  इस  पठार  की सर्वोच्च  चोटी है।   इस पठार  की चैतुरगढ़  चोटी  को छत्तीसगढ़ का पठार  कहा जाता है।

 

**** धमतरी  - महासमुंद  पठार *****

* धमतरी  - महासमुंद  पठार  दक्षिण  - पूर्वी  सीमान्त  क्षेत्र  ( महानदी  बेसिन ) में आता है।  यह धमतरी  ,कुरुद  ,राजिम , महासमुंद  , गरियाबन्द  , सरायपाली  और  देवगढ़  तहसीलों  में विस्तृत  है।  

* इसकी औसत  ऊंचाई  400 -900  मी. है।  इसके पठार  की सबसे  ऊँची  चोटी  धारीडोंगर  ( 899 मी. ) है।  

 

*****  दुर्ग  का पठार *****

*  दुर्ग  पठार  पश्चिम  की ओर रायपुर  उच्च  भूमि  के समानांतर  विस्तृत  है।   इस पठार  का सबसे  महत्वपूर्ण  धरातलीय  स्वरूप  डल्ली -राजहरा  की पहाड़ियां है।  दुर्ग  जिले  के दक्षिण  भाग  में इसकी  औसत  ऊंचाई  700  मी.  है।  



**** बस्तर का पठार  ****

*  बस्तर का पठार  छत्तीसगढ़  राज्य  में  दण्डकारण्य के  उत्तर -पूर्वी  भाग में है। इसका विस्तार मुख्य रूप से  बस्तर एवं सुकमा  क्षेत्र में   है।  

* इसकी औसत ऊंचाई  450 -750 मी.  है।  यह  पठार घने वनो  से आच्छादित  है।   खनिज  सम्पदा  की दृष्टि  से  यह समृद्ध है।  

* यहां  लौह - अयस्क , अभ्रक , मैगनीज , बाक्साइड  ,चूना -पत्थर  आदि  खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध  है।  

 

*****बैलाडीला  पहाड़ी *****

* यह  पहाड़ी बस्तर  के पठार  में दंतेवाड़ा  जिले  में स्थित है।  राज्य की  यह  पहाड़ी  अपने उच्च गुणवत्ता  के लौह -अयस्क  हेतु  प्रसिद्ध है।  

* इस पहाड़ी  की सबसे  ऊँची  चोटी नन्दीराज  (1210  मी. ) है।  

* यह  पहाड़ी राज्य के सबसे प्राचीन  शैलो  में  निर्मित  है।  

 

***** अबूझमाड़  की पहाड़ियां  ****

* अबूझमाड़ की पहाड़ियां छत्तीसगढ़ राज्य में  दण्डकारण्य  के मध्य पश्चिमी  भाग में  विस्तृत हैं। 

* इनका अधिकांश भाग  नारायणपुर  जिले के  दक्षिण -पश्चिमी  भाग में  तथा कुछ  भाग पंखाजूर ( कांकेर ) , बीजापुर  तथा डोगरगांव  तक  विस्तृत है।  

* इन पहाड़ियों  की  खुरसेल  घाटी में सर्वोत्तम  किस्म के सागौन वन पाए  जाते है।     

* छत्तीसगढ़  में सर्वाधिक वर्षा  यहीं पर होती है।  इसलिए  इन पहाड़ियों को  छत्तीसगढ़ का  चेरापूँजी  भी कहा जाता है।  

 

 

 

          **** 4.  पाट प्रदेश  *****

 

*  पाट  प्रदेश  राज्य क सबसे  छोटा  भौतिक  प्रदेश है।  साधारणतः  पठारी  क्षेत्र  के समतल ऊपरी  भाग को पाट  कहते है। 

* यह  प्रदेश का राज्य  के उत्तर -पूर्व  में स्थित  है  तथा  संरचना  की दृष्टि से  यह  छोटानागपुर  पठार का ही भाग है।  

* यह  जशपुर , सरगुजा  जिले  की सीतापुर  एवं मैनपाट  तहसील  , बलरामपुर  की सामरी  - कुसमी  तहसील  तक विस्तृत  है।  

*  इस  प्रदेश के अधिकतर भाग  में महानदी  अपवाह  तंत्र  का विस्तार है।  

* इस  प्रदेश में  मुख रूप से  मानसूनी साल वनो का  विस्तार है।

 

इस  क्षेत्र के  प्रमुख  पाट  प्रदेशो का  विवरण  इस प्रकार है :-

 

 

**** मैनपाट *****

 

* यह सरगुजा  जिले  के दक्षिण - पूर्वी  भाग  में  स्थित है। 

* इसकी  समुद्रतल से  ऊंचाई  1152  मी.  है। इस पर  लैटेराइट  मृदाएँ  तथा कहीं -कहीं  दकक्न  ट्रैप  चट्टानें  मिलती है।  

* यह  छत्तीसगढ़ का सबसे ठंडा  स्थल है , इसलिए इसे  छत्तीसगढ़ का  शिमला      कहा जाता है।  यहां  टाइगर  पाइंट , इको  पाइंट  आदि  दर्शनीय स्थल है।  

* यह मांड  नदी का उद्गम  स्थल है।  

* यहां बाक्साइड  खनिज प्रचुर मात्रा  में पाया जाता है। 

* मैनपाट  पहाड़ी  कोरबा  जनजाति  के लिए  प्रसिद्ध  है। 

 

 

******* जारंगपाट  *****

* यह सरगुजा  एवं बलरामपुर जिलों में स्थित है।  इसकी  समुद्रतल से  ऊंचाई  1145  मी. है। 

* यह  राज्य में बाक्साइड  का सबसे  बड़ा भंडारण क्षेत्र है। 

 

 

***** सामरीपाट  *****

* यह बलरामपुर  जिले में  स्थित है।  इस पाट को मुख्य रूप से दो भागो - जमीर पाट (पूर्वी भाग )  व लहसुन  पाट (पश्चिमी  भाग ) में  बाटा  जाता है।   जमीरपाट  को  बाक्साइड का मैदान भी  कहा जाता है।   

* लहसुन पाट में  राज्य की सबसे ऊँची चोटी   गौरलाटा (1225 मी. ) स्थित है।  

* इस क्षेत्र  में कन्हार  और मेयोर  नदियां  प्रवाहित होती है  तथा  यहां  पर  कोटरी  जलप्रपात  स्थित है। 

 

****** जशपुर पाट *****

* ईब  तथा  मैनी  नदियों की समतल , उत्तर की पठारी  एवं   पाट भूमि  को  जशपुरपाट  कहा जाता  है।   यह  जशपुर  जिले में  स्थित है।  

* यह राज्य का सबसे बड़ा पाट प्रदेश है। इसका क्षेत्रफल 6208  वर्ग कि मी.   है।  

*  यह  महानदी  के मैदान  में ऊपर  छोटानागपुर के पठार में मिल जाता  है।  

* वर्ष  1962  में तिब्बती  शरणार्थियों  को यहां  बसाया गया था।  

 

***** पेण्ड्रापाट  ******

* यह पाट  प्रदेश  जशपुर  जिले  में स्थित  है।  इस क्षेत्र  से  ईब तथा  कन्हार   नदी  का उद्गम  होता है।  

* इस पाट को छत्तीसगढ़ का बगीचा कहा जाता है।  

 

                            

 

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