Thursday, 9 July 2020

छत्तीसगढ़ का साहित्य , Literature of chhattisgarh , cg ka sahitya

छत्तीसगढ़ का साहित्य






छत्तीसगढ़ के साहित्य को विशेषताओं  व कालक्रम के आधार पर तीन भागो में बाटा गया है ,वे निम्न है  :-

 

 

 

 

१.   प्राचीन या गाथा युग  (1000 ई.  से 1500 ई. )

२.   मध्यकाल या भक्ति युग (1500 ई. से 1900 ई. )

३.   आधुनिक काल (1900 ई. से प्रारम्भ )

 

 

 

1 .    प्राचीन काल या गाथा युग 

                     *    छत्तीसगढ़ी  साहित्य के इस काल में प्रेम ,धार्मिक  व वीरता गाथाओं का प्रचलन था। 

                      *  इस काल की प्रमुख प्रेम गाथाएँ अहिमन रानी ,रेखा रानी   केवला रानी थी।  ये गाथाएँ अपने बदलते स्वरुप के साथ वर्तमान में भी प्रचलित है।  

                      *  इस काल की प्रमुख धार्मिक गाथाएं  फुलबासन  पंडवानी   है।  फुलबासन  गाथा ,सीता व लक्ष्मण की कथाओं पर आधारित है तथा पंडवानी द्रौपती से संबंधित है।  

                     *   इस काल की प्रमुख वीरगाथा लक्ष्मीनिधी  कर्णराय  की गाथा   खैरागढ़ के राजा से संबंधित है। 

                    *  इस काल के प्रमुख कवि दलपतराव  थे।  

 

 

 

2.   मध्यकाल या भक्ति युग 

                *  छत्तीसगढ़ साहित्य के इस काल में मुख्य रूप से भक्ति आंदोलन प्रारम्भ हुआ।  

                  *  राज्य में भक्ति आंदोलन का प्रारम्भ कबीरपंथ   के विस्तार से हुआ।  राज्य में कबीरपंथ का प्रसार प्रमुख कवि धर्मदास ने प्रारम्भ किया।  

                 *  भक्ति आंदोलनों  के साथ -साथ राज्य में इस काल में वीरगाथाएं भी प्रचलित थी।  इस काल की प्रमुख वीरगाथाएं कल्याणसाय  की गाथा , फूल कुंवर की गाथा ,गोपल्ला गीत ढोलामारु थी।  

 

 

3 .    आधुनिक काल 

            *  इस काल में अनेक साहित्यो को रचना हुई।  इस काल में प्रमुख प्रारम्भिक नरसिंह दास वैष्णव द्वारा रचित शिवायन (1904 ) तथा पं. सुंदरलाल शर्मा द्वारा रचित दानलीला (1912 ) प्रमुख है।  

               *   शिवायन छत्तीसगढ़ की  प्रथम कविता  व दानलीला  छत्तीसगढ़ का प्रथम खंडकाव्य  है।                               

                         

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