Sunday, 5 July 2020

छतीसगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य Wildlife Sanctuary of chhattisgarh , abhyarn cg , cgpsc

छतीसगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य

Wildlife Sanctuary of chhattisgarh




राज्य के प्रमुख वन्यजीव अभ्यारण्य   निम्न है  :-

 

१.    सीतानदी अभ्यारण्य 

             यह राज्य का सबसे पुराना अभ्यारण्य है ,इसकी स्थापना धमतरी में वर्ष 1974 में की गयी। इस अभ्यारण्य का क्षेत्रफल 559 वर्ग किमी. है।  यह सर्वाधिक तेंदुए पाए जाते है ,तथा वर्ष 2009 में इसे टाइगर रिज़र्व में शामिल किया गया था।  इस अभ्यारण्य के प्रमुख जीव बाघ ,तेंदुआ ,साम्भर ,चीतल व भालू है।  

 

 

२.   गोमर्दा  अभ्यारण्य 

          इस अभ्यारण्य की स्थापना रायगढ़ जिले में वर्ष 1975 में की गई थी।  इस अभ्यारण्य का क्षेत्रफल 278 वर्ग किमी. है।  यहां बाघ,तेंदुआ ,गौर ,भालू ,नीलगाय ,वराह,कोटरी ,चीतल ,साम्भर , सोनकुत्ता आदि वन्यप्राणी  मिलते है।  

 

३.   अचानकमार  अभ्यारण्य 

          इस अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1975 में मुंगेली जिले में की गई थी।  यह साल /सागौन के वृक्षों से  आच्छादित वन्य और सौंदर्य का अनूठा भंडार है।  यह वन्य प्राणियों के अवलोकन का सुंदर स्थल है।   इस अभ्यारण्य का कुल क्षेत्रफल 553. 28 वर्ग किमी. है।  यहां सर्वाधिक बाघ पाए जाते है।  इसके मध्य से मनियारी नदी बहती है। वर्ष 2009 में इसे टाइगर रिजर्व में शामिल किया गया तथा यह राज्य का सबसे बड़ा टाइगर रिज़र्व है।  

 

४.   बादलखोल अभ्यारण्य 

         इस अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1975 में जशपुर जिले में की गयी थी।  इसका क्षेत्रफल 105 वर्ग किमी. है।  इस अभ्यारण्य में पाए जाने वाले प्रमुख जीव हिरण ,चिंकारा ,साम्भर ,चौसिंघा  आदि है।  इस अभ्यारण्य में प्रवासी पक्षी आकर रुकते है।  यहां पक्षियों की कुल दुर्लभ प्रजाति पाई जाती है।  यह सबसे छोटा वन्यजीव अभ्यारण्य है।  

 

 

५.     बारनवापारा अभ्यारण्य 

             इस अभ्यारण्य की स्थापना महासमुंद जिले में वर्ष 1976 में की गई थी।  इस अभ्यारण्य का क्षेत्रफल 245 वर्ग किमी. है।  यहां सर्वाधिक   सांप पाए जाते है।  तथा चीतल ,हिरण  व बंदर आदि पाए जाते है।  इस अभ्यारण्य के मध्य से बलमदेई नदी बहती है।   

 

 

६.    सेमरसोत अभ्यारण्य 

            इस अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1978 में बलरामपुर जिले में की गई।  इस अभ्यारण्य का कुल क्षेत्रफल 430. 36 वर्ग किमी. है।  यहां मुख्य रूप से बाघ ,तेंदुआ ,नीलगाय ,गौर।,भालू ,चीतल ,साम्भर,आदि वन्य जीव पाए जाते है।  

 

७.    तमोर पिंगला अभ्यारण्य 

             इसकी स्थापना वर्ष 1978 में बलरामपुर जिले में की गई थी।  इसका क्षेत्रफल 608 वर्ग किमी. है।  तथा यह राज्य का सबसे बड़ा वन्यजीव अभ्यारण्य है।  यहां सर्वाधिक संख्या में नीलगाय पाई जाती है।  यहाँ मुख्य रूप से बाघ , चीतल व साम्भर पाए जाते है।              

 

८.     भैरवगढ़  अभ्यारण्य 

              बीजापुर जिले का भैरवगढ़ अभ्यारण्य वन भैंसो को संरक्षण प्रदान करने के लिए वर्ष 1983 में गठित किया गया।  यह अभ्यारण्य 139 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।  यहां मुख्य रूप से चीतल ,बाघ , वराह ,साम्भर आदि पाए जाते है।  

 

९.    पामेड़ ( धामेद  )   अभ्यारण्य

            इसकी स्थापना वर्ष 1983 में बीजापुर में की गई थी।  इस अभ्यारण्य का क्षेत्रफल  262 वर्ग किमी. है।  यहां बाघ ,तेंदुआ ,चीतल ,तथा साम्भर आदि पाऐ जाते है।  भैरवगढ़  अभ्यारण्य की भाती यहां भी वन भैंसो को विशेष संरक्षण प्राप्त है।  

 

 

१०.    उदंती  अभ्यारण्य 

                 इस अभ्यारण्य की स्थापना गरियाबंद जिले में वर्ष 1983 में की गई थी।  यहां सर्वाधिक संख्या में वन भैंसा व मोर पाए जाते है।  इसका क्षेत्रफल 230 वर्ग किमी. है।  इस अभ्यारण्य को वर्ष 2009 में टाइगर रिज़र्व में शामिल किया गया था।   वन भैंसा व मोर के अतिरिक्त यहां सियार ,तेदुआ,भालू ,साम्भर ,बाघ आदि पाए जाते है।  इस अभ्यारण्य के मध्य से उदयन्ती नदी बहती है।  

 

११.    भोरमदेव अभ्यारण्य 

         इसकी स्थापना वर्ष 2001 में कवर्धा जिले में की गई थी।  इस अभ्यारण्य का क्षेत्रफल  163 वर्ग किमी. है।  इस अभ्यारण्य में वन संरक्षण एवं संवर्द्धन के अतिरिक्त बाघ ,भालू ,साम्भर ,चीतल ,नीलगाय इत्यादि वन्यप्राणियो के संरक्षण की व्यवस्था है।  

        

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