Saturday, 1 August 2020

छत्तीसगढ़ के फसलों का वर्गीकरण , Crop classification of chhattisgarh, phaslo ka vargikaran , cgpsc

 

 

***छत्तीसगढ़ के फसलों का वर्गीकरण*** 




छत्तीसगढ़ की प्रमुख फसलों का वर्गीकरण निम्न आधार पर किया गया  है :-

1 .  आनाज की फसलें 

2 .   नकदी फसलें 

3 .   दलहन फसलें 

4 .   तिलहन फसलें 

5 .   बागवानी फसलें 

 

 

 

        ** ( ****अनाज की फसलें *****)**

चावल , गेहूँ ,कोदो -कुटकी ,ज्वार ,मक्का आदि छत्तीसगढ़ की प्रमुख फसलें है।  इनका विवरण निम्न है -

१.  चावल (धान )

   * यह राज्य की मुख्य फसल है।  इसलिए छत्तीसगढ़  को धान का कटोरा भी कहा जाता है।  प्रदेश में कुल कृषि योग्य भूमि के 67 % भाग में चावल की खेती होती है। चावल की फसल वर्षा के आरम्भ में बोई जाती है। 

  * कुछ क्षेत्र में ग्रीष्म एवं शीत ऋतु  में  भी धान की खेती होती है।  

  * छत्तीसगढ़ में मुख्यतः चावल की खेती मैदानी भागो में अधिक होती है। इसके मुख्य क्षेत्र दुर्ग ,जांजगीर -चांपा ,रायपुर ,धमतरी ,बिलासपुर ,राजनांदगांव  ,कोरबा ,सरगुजा  आदि है।  

  * सर्वाधिक  चावल उत्पादक जिले जांजगीर -चांपा ,धमतरी ,रायपुर  आदि है।  

 * रायपुर स्थित चावल अनुसंधान केंद्र को वर्ष 1979  में प्रादेशिक  कृषि अनुसंधान  स्टेशन के रूप में परिवर्तित कर  दिया  गया।  

  * छत्तीसगढ़ में चावल की स्वर्णा ,महामाया ,पूर्णिमा ,आई. आर. 36  ,आई. आर. 64 , बम्लेखरी ,दंतेश्वरी ,क्रांति अन्नदा ,सफरी ,इंदिरा 9 ,विष्णुभोग ,दुबराज ,बादशाह  भोग  आदि  प्रमुख किस्मे उगाई जाती है।

 

 

 

२. कोदो -कुटकी 

* कोदो -कुटकी मोटे  आनाज की फसले है। धान  के बाद राज्य में कोदो -कुटकी का दूसरा स्थान है। 

* इसे गरीबो का आनाज भी कहा जाता है। 

 * यह कम उर्वरता वाले ,कम वर्षा वाले असमतल  क्षेत्रो में बोई जाती है।  बस्तर संभाग  (बस्तर ,कांकेर ,दंतेवाड़ा ,सुकमा ,नारायणपुर ,बीजापुर ,कोंडागांव ) में इसकी कृषि का प्रचलन  अधिक है।  

 

 

 

 

 

३.  मक्का 

* राज्य में चावल व कोदो -कुटकी के बाद सर्वाधिक मक्का का उत्पादन होता है। 

 * यह प्रदेश के सभी हिस्सों में उगाई जाती है।  सरगुजा ,बस्तर ,दंतेवाड़ा ,कोरिया  ,जशपुर ,कोरबा ,बिलासपुर  आदि प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है।  

 * सरगुजा जिले के अतिरिक्त  दंतेवाड़ा ,बस्तर  तथा कोरबा  में मक्का का सर्वाधिक उत्पादन  होता है।  

 

 

 

 

४.  ज्वार 

* ज्वार खरीफ एवं रबी  दोनों फसल है , लेकिन ज्वार का खरीफ क्षेत्र अधिक है।  यह जून - जुलाई  में बोई  जाती है ,एवं  सितंबर -अक्टूबर  में काट ली जाती है।  

 

 

 

 

 

 

५.   गेंहू       

* राज्य में गेंहू कम मात्रा में बोया जाता है जिसका प्रमुख कारण शीतकाल में सिंचाई की सुविधा की कमी है। 

* राज्य के प्रमुख गेंहू उत्पादक जिले  बिलासपुर ,बलरामपुर ,कबीरधाम ,दुर्ग ,सरगुजा  है। 

 



 

 

 

 

          ** (***** नकदी फसलें  **** )**

कपास व गन्ना  छतीसगढ़ की प्रमुख नकदी फसलें है।  इनका विवरण  निम्न है -

१.  कपास 

* छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ,बस्तर ,सरगुजा एवं धमतरी  जिलों में  अल्प  मात्रा में कपास  की खेती की जाती है।  यह जून -जुलाई  में बोई जाती है।  

* राज्य में कपास की फसल को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय पोषित  सघन कपास  विकास कार्यक्रम  बस्तर ,दंतेवाड़ा  और कांकेर  जिलों  में चलाया  जा रहा है।  

 

 

 

२.   गन्ना 

* राज्य में गन्ने की खेती राजनांदगांव ,कबीरधाम ,दुर्ग ,रायपुर  तथा इसके आस-पास  के क्षेत्रो  में की जाती है।  

* सरगुजा ,रायगढ़ ,बस्तर  तथा बिलासपुर  जिलों में  भी इसकी खेती होती है।  

 

 

 

 

३.  सन (जूट )तथा मेस्टा 

* सन तथा मेस्टा का उत्पादन  केवल रायगढ़ में होता है ,क्योकि यहां इस राज्य की एकमात्र  जूट मिल स्थापित है।  

 

 

 

 

४.  सनई 

* इसका उत्पादन केवल रायगढ़ जिले में होता है ,जो यहाँ की जूट मिलो  के लिए जूट के विकल्प  के रूप में विकसित किया जा रहा है।  

 

 

 

 

 

           ** ( ***** दलहन फसलें  ****)**         

छत्तीसगढ़ में मुख्य रूप से चना ,उड़द  जैसी  दलहन  फसलों  की खेती की जाती है।  इनका विवरण निम्न है -

 

१.  चना 

* यह राज्य की प्रमुख दलहन फसल है।  

* चने की प्रमुख उत्पादक क्षेत्र  दुर्ग ,कबीरधाम ,बिलासपुर ,राजनांदगांव ,रायपुर इत्यादि है।  

* राज्य में काली मिट्टी का क्षेत्र चने का मुख्य उत्पादक क्षेत्र है।  

* इस दलहन के उत्पादन में न्यूनतम  समर्थन  मूल्य के साथ बोनस नहीं दिया जाता है। 

 

 

२.  उड़द 

* दलहन  में चने के बाद दूसरा स्थान उड़द का है।  इसके उत्पादन  में अग्रणी  जिले रायगढ़ ,कोरबा ,धमतरी  एवं महासमुंद  है। 

 

 

 

 

 

नोट - राज्य की दलहन फसल ( तुअर ,मूंग ,उड़द  तथा अरहर ) को न्यूनतम   समर्थन मूल्य  के साथ बोनस दिया जाता है। 

 

      

       ** ( **** तिलहन  फसलें  ****)**

सोयाबीन ,अलसी  तथा मूंगफली छत्तीसगढ़ की प्रमुख तिलहन  फसले है। इनका विवरण निम्न है -

 

१.  सोयाबीन 

* यह राज्य की प्रमुख तिलहन फसल है।  यह फसल जून-जुलाई  के मध्य में बोई जाती है।  धान की फसल के साथ -साथ राज्य की मिट्टी  सोयाबीन  फसल के लिए अत्यंत लाभकारी है।

 

 

 

 

२.  अलसी 

* यह राज्य की परम्परागत  तिलहन फसल है ,जिसका उपयोग प्राचीन समय से यहां के लोग खाद्य तेल के रूप में करते आए है।  प्रदेश में यह उत्तरा फसल के रूप में बोई जाती है।  अलसी सम्पूर्ण प्रदेश की सर्वाधिक  लोकप्रिय  तिलहन है।  

 

 

 

      


 

 

 

३. मूंगफली 

* यह प्रदेश  में रायगढ़ ,महासमुंद ,सरगुजा ,बिलासपुर ,जांजगीर -चाम्पा  तथा रायपुर  जिलों  में मुख्यतः बोई जाती है।  मूंगफली  का उपयोग तेल एवं भोज्य पदार्थ  दोनों  के लिए किया जाता है।  यह मुख्यतः खरीफ फसल है।  

 

 

 

 

 

       ** ( ***** बागवानी  फसलें *****) **      

* राज्य में उद्यानिकी  फसलों का कुल क्षेत्रफल 7 . 70  लाख हेक्टेयर है।  बागवानी क्षेत्रो में समग्र  विकास  के लिए 10 वीं   पंचवर्षीय  योजना के अंतर्गत  राज्य में वर्ष 2005 -06  में राष्ट्रीय बागवानी मिशन आरम्भ किया गया था।  

* उद्यानिकी  क्षेत्र में सब्जियों का फसल क्षेत्र सबसे अधिक है। 

* राज्य में बागवानी फसलों को  क्षेत्रवार  तीन  भागो में बाटा गया है-

  १.  उत्तरी  क्षेत्र - आलू ,लीची ,स्ट्राबेरी ,टमाटर  और नाशपाती  आदि। 

  २.  मध्य क्षेत्र -आम ,केला ,अमरुद आदि। 

  ३.  दक्षिणी  क्षेत्र -नारियल ,तेजपत्ता , काली मिर्च ,काजू  आदि।  

 

 

 

  *****लुडेग  : टमाटर राजधानी ****

(जशपुर)  जिले का लुडेग नामक स्थान सर्वाधिक  टमाटर  उत्पादन  करने वाला  क्षेत्र है।  बड़े  पैमाने पर टमाटर के उत्पादन  के कारण  इसे छत्तीसगढ़ की  (टमाटर राजधानी) भी कहा  जाता है।   

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