Tuesday, 28 July 2020

छत्तीसगढ़ की लोक चित्रकला , Folk painting of chhattisgarh , chhattisgarh ki lok chitra kala ,cgpsc



****छत्तीसगढ़ की लोक चित्रकला ****

 

*  छत्तीसगढ़ में अनेक प्रागैतिहासिक गुफाएं है ,जिनमे आदिमानव के द्वारा बनाये हुए रेखाचित्र  निर्मित है।  इन्ही गुफा चित्रों  से लोकचित्रो  का उद्भव और विकास हुआ था।  

 

*  छत्तीसगढ़ की लोक चित्रकला  एक प्रकार से महिलाओ  की कला  है , क्योकि विभिन्न प्रयोजनो  पर यह कार्य महिलाएं ही सम्पन्न करती है।  राज्य की प्रमुख लोक चित्रकला  इस प्रकार है -

 

 

***** गोबर  चित्रकारी ****

       

            दीपावली के समय व गोवर्धन पूजा के समय राज्य में धान की कोठी  में गोबर द्वारा अनेक चित्र बनाए जाते है ,जिसमे अन्न लक्ष्मी की पूजा की जाती है।  यह चित्रांकन समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है। 

 


**** हरितालिका ****

          हरितालिका का चित्र भी तीज - त्यौहारों  के दिन बनाया जाता है।  हरितालिका  शिव -पार्वती की पूजा का पर्व है।  इस दिन महिलाए  व्रत से संबंधित वार्ता कहती है।  

 

***** चौक लिपना  ****

           राज्य के लगभग सभी त्यौहारों में चौक -लिपना  किया जाता है।  इसमें गोबर की लिपाई के ऊपर भीगे चावल के घोल  से या सूखे  आटे  से अनेक  प्रकार की चित्रकारी की जाती है।   

 

 

****आठे कन्हैया  ****

      कृष्ण  जन्माष्टमी पर मिट्टी के रंगो से भित्ति पर बनाया जाने वाला कथनात्मक चित्रण है ,जिसमे  कृष्ण की जन्म कथा का चित्रण होता है।  

 

 

 

 

 

**** सवनाही  ****

          सावन मास की हरियाली अमावस्या को छत्तीसगढ़ी  महिलाएं  घर के मुख्य द्वार की दीवारो  पर गोबर से सवनाही  चित्र का अंकन करती है।  गोबर को हाथ में लेकर चार  अंगुलियों  के सहारे की चारो दीवारों को मोटी  रेखा से घेर दिया जाता है।  

 

***** बालपुर  चित्रकला  ****

          महानदी के किनारे बसे गावों में विभिन्न पौराणिक  चित्र  बनाने वाले  चितेर कलाकार दीवारों पर  विस्तृत  चित्रकथाये  चित्रित  करते है ,जिसे बालपुर (ओडिसा )  लोकचित्र शैली के नाम से जाना जाता है।  छत्तीसगढ़ के चितेर  जाति के लोग  ओडिसा  से आकर  बसे है और वे पेशेवर  कलाकार है।  

 

**** घर  सिंगार ****

        गृह  सज्जा कला  सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में प्रचलित है।  छत्तीसगढ़ की प्रत्येक महिला गृह  सज्जा कला में पारम्परिक  रूप से दक्ष होती है।   लिपी हुई दीवार पर गेरू , काजल ,पीली मिट्टी से घर के मुख्य द्वार के आस -पास  और बाहरी  दीवार पर छत्तीसगढ़ी महिलाएं अपने हाथो से विभिन्न् ज्यामितिक  रूपाकार  बनाती है ,जो अधिक मनोरम  प्रतीत  होते है। 

 

 

**** विवाह  चित्र ****

         विवाह आदि अवसरो  पर छत्तीसगढ़ में चितेर  जाति  के  लोग दीवारों  पर विविध मिट्टी के रंगो से चित्र बनाने के लिए  आमंत्रित किए जाते है ,जो द्वार सज्जा के साथ  पशु -पक्षियों , देवी -देवताओं , विवाह प्रसंगो  आदि  के अलंकृत चित्र बनाते है।  

       

 

**** नोहडोरा  ***

            छत्तीसगढ़ी  महिलाएं नया  घर निर्माण करते समय दीवारों पर मिट्टी से सज्जात्मक ,उठे  हुए अथवा गहरे  चित्रण करती है ,जो कई  वर्षो तक दीवारों पर बने रहते  है ,जिसे  छत्तीसगढ़ी में नोहडोरा डालना कहते है।  यह एक प्रकार की उद्रेखण कला है ,जो गीली दीवार पर बनाई जाती है।    

            

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