Saturday, 25 July 2020

छत्तीसगढ़ औद्योगिक केंद्र विकास निगम

 

छत्तीसगढ़ औद्योगिक  केंद्र विकास  निगम 

* * छत्तीसगढ़ औधोगिक केंद्र विकास  निगम ,रायपुर  की स्थापना  नवंबर , 2001  में की गयी थी।  इसका मूल उद्देश्य  नवीन  औद्योगिक  विकास  केन्द्रो का विकास तथा उद्योग  विभाग  द्वारा  पूर्व  में स्थापित  औधोगिक  क्षेत्रो  का रख -रखाव  करना है।  

 

* *  छत्तीसगढ़ के 16 जिलों  निगम के कार्यक्षेत्र में आते है। ,जिसके  अंतर्गत  राज्य शासन से स्वीकृति   औधोगिक  केंद्र  विकसित किए गए है।  जिनका विवरण  इस प्रकार है -

 

 

     औधोगिक विकास केंद्र ,  "उरला"  

यह वृहद औधोगिक क्षेत्र है।  यह 251  हेक्टेयर  क्षेत्र में विस्तृत है।   इस क्षेत्र में 60 वृहद  और मध्यम उद्योग तथा लगभग 550 लघु उद्योग स्थापित है ,जिनमे  5220 करोड़  से अधिक  का पूँजी  निवेश हुआ है  और 15 ,500 से अधिक व्यक्तिओ को प्रत्यक्ष  रोजगार  प्राप्त हो रहा है।  अंचल  के निर्यातक  उद्योगो की सुविधा और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कण्टेनर  फ्रेट  स्टेशन  की स्थापना भी इस औधोगिक क्षेत्र में की  गयी  है।   यह सर्वाधिक  निवेश  वाला  औधोगिक  केंद्र है। 

 

 

  औधोगिक  विकास केंद्र , "सिलतरा "

इस औधोगिक क्षेत्र में आधारभूत  संरचनाओं  की स्थापना  हो चुकी  है।  जल  प्रदाय  योजना  के लिए निजी  क्षेत्र  के सहयोग से खारुन नदी पर एक एनीकट का निर्माण किया गया है ,जिससे ग्रीष्म  ऋतु  में भी उद्योगो को पर्याप्त  जल प्राप्त होता है।  

 

 

औधोगिक  विकास केंद्र , "बोराई "

 औधोगिक क्षेत्र बुराई की स्थापना लगभग 192 हेक्टेयर भूमि पर हुई  है। राष्ट्रीय राजमार्ग -53   दुर्ग  बाईपास इस औधोगिक क्षेत्र के बीच से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में 199 उद्योग कार्यरत है। 

 

 

औधोगिक विकास केंद्र , "सिरगिट्टी "(बिलासपुर )

  यह  औधोगिक  क्षेत्र  लगभग 217  हेक्टेयर  भूमि पर फैला हुआ है।   बिलासपुर शहर से लगे हुए  इस औधोगिक  क्षेत्र में रेलवे  तथा  साऊथ -ईस्टर्न  कोल  फील्ड्स  पर आधारित  अनेक  सहायता  उद्योगों  की स्थापना  हुई है। 

 

हस्तशिल्प  एवं हथकरघा विकास निगम 

  हस्तशिल्प  एवं हथकरघा विकास  निगम की  स्थापना  शासन  के एक उपक्रम  के रूप में वर्ष 1981  में हुई  थी।  निगम ने अपनी विकासात्मक  गतिविधियां  जुलाई , 1982 से प्रारम्भ  की।  राज्य  में निगम  निर्धारित  प्रावधानों  के अंतर्गत  कार्यरत है। 

 

नोट  :- सर्वाधिक  औधोगिक  रूप से विकसित  जिला दुर्ग है।    

 

  

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