Friday, 24 July 2020

छत्तीसगढ़ में परम्परागत हस्तशिल्प उद्योग , Handicraft company in chhattisgarh, hastshilp uddhog cg , cgpsc

 

 

छत्तीसगढ़ में परम्परागत हस्तशिल्प उद्योग





आधुनिक उद्योगों के विकसित होने से हस्तशिल्प को बड़ी प्रतिस्पर्धा  का सामना करना पड़ रहा है, फिर भी राज्य के कुछ क्षेत्र में हस्तशिल्प उद्योग पाए जाते है।  वे इस प्रकार है :-

*** हथकरघा  उद्योग ****

         राज्य के लगभग सभी जिलों में कोष्ठा ,पनका  व महरा  जातियों द्वारा कपड़े की बुनाई मुख्य रूप से किया जाता है।  रायपुर जिला परिषद द्वारा स्थापित बुनकर शेड में बुनकरों को प्रशिक्षण दिया जाता है। हथकरघा उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए एकीकृत हथकरघा  विकास योजना व बुनकर स्वास्थ्य  बीमा योजना संचालित है। 

 

 

 

 

 

*****पीतल एवं घंटा कांस्य *****

         पीतल एवं घंटा कांस्य ,तांबा तथा टिन मिश्रित होता है।  इसके मिश्रण से बर्तन एवं आभूषण  बनाया जाता था।  यह उद्योग छत्तीसगढ़ में रायपुर ,नवापारा  तथा धमतरी  में देखने को मिलता है।  

 

 

 

***** बस्तर में धातु  शिल्प *****

           बस्तर में धातु शिल्प का कार्य पूर्व समय में मुख्य रूप से घड़वा  नामक जाति करती थी ,इसलिए इसे   "घड़वा  शिल्प " या    "ढोकरा शिल्प " भी कहा जाता है।  यह उद्योग वर्तमान में भी प्रचलित है ,इसमें देवी -देवताओ  की मूर्तिया  बनाई  जाती है।  इस शिल्प में धान  का भूसा , रुई ,काली मिट्टी, पीतल , मोम  एवं रेतीली  मिट्टी   का उपयोग होता है। 

 

 

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