Tuesday, 14 July 2020

छत्तीसगढ़ के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी Freedom fighter of chhattisgarh , swatantrata senani cg, sena , cgpsc

 छत्तीसगढ़ के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी 

 

 

छत्तीसगढ़ राज्य से संबंधित प्रमुख स्वतंत्रता  सेनानियों का वर्णन निम्न है :-

 

1.   गुण्डाधुर 

              *  वर्ष 1910 में  गुण्डाधुर ने बस्तर में आदिवासियों के साथ भूमकाल  विद्रोह का नेतृत्व किया था तथा सबसे पहले बस्तर का पशुबजार  लुटा। 

              *  गुण्डाधुर का अभियान तांत्याटोपे की तरह होता था।  वे तीव्र गति से एक स्थान से दूसरे स्थान में पहुंच कर लोगो को प्रेरित करते थे।  

               *   इनके नाम से राज्य के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के लिए पुरस्कार दिया जाता है।  

 



2.    सुरेंद्र  साय 

 

                *   इनका जन्म ओड़ीसा के  संबलपुर  जिले के खिड़ा ग्राम में 1809  में हुआ था।  1857 के स्वतंत्रता सग्राम में संबलपुर के साय  परिवार की भूमिका  विशेष रूप से उल्लेखनीय  रही।  

               *  प्रथम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अंतिम शहीद सुरेंद्र साय थे। 

 

 

3.    वीरनारायण सिंह 

               *  इनका जन्म सोनाखान (बलौदा बाजार ) में 1795 में हुआ था।  ये बिझवार जनजाति के थे।  

               *   1857  ई.  की क्रांति के समय इन्होने अंग्रेजो के विरुद्ध विद्रोह किया ,जिन्हे 10 दिसंबर ,1857  को जयस्तंभ  चौक पर फांसी  दिया गया।  

 

 

4.   रविशंकर शुक्ल 

               *   इनका जन्म  2 अगस्त ,1877  को सागर (मध्य प्रदेश ) में हुआ था।  स्वतंत्रता संग्राम के दौरान तिलक के विचारो से प्रभावित होकर  इन्होने असहयोग आंदोलन में सक्रिय योगदान दिया।  इन्होने रायपुर में सविनय अवज्ञा आंदोलन का नेतृत्व भी किया था।  पंडित रविशंकर शुक्ल को अविभाजित  मध्यप्रदेश  के प्रथम मुख्यमंत्री होने का श्रेय प्राप्त है।  31 दिसंबर ,1956 को इनकी मृत्यु ही गई।  

 

 

5.     पं. सुंदर लाल शर्मा 

                     *  इनका जन्म 21 दिसंबर ,1881 को गरियाबंद में हुआ था।  इन्हे छत्तीसगढ़ का गाँधी कहा जाता है।  छत्तीसगढ़ राज्य की प्रथम कल्पना इन्होने ही की थी।  

                          *  इन्होने  काण्डेल  नहर सत्याग्रह का नेतृत्व किया था,तथा गाँधी जी से पहले ही अछूतो के उद्धार का कार्यक्रम प्रारम्भ किया  था।  

                       * छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इनके नाम से साहित्य लेखन में पुरस्कार  दिया जाता है।

 

6.    छेदीलाल 

                  *   इनका जन्म 1887  ई. में  बिलासपुर के अकलतरा (जांजगीर -चांपा ) में हुआ था।  

                  *   वर्ष 1913 में ये बैरिस्टर की  उपाधि लेकर ब्रिटेन से भारत लौटे।  ये बिलासपुर के प्रथम बैरिस्टर थे।  

                   *  इन्होने वर्ष 1920  के असहयोग आंदोलन ,नागपुर के झंडा सत्याग्रह तथा सविनय अवज्ञा आंदोलन में अपना सक्रिय योगदान दिया।  

                     *   वर्ष 1946  में वे संविधान निर्मात्री सभा में बिलासपुर से सदस्य चुने गए।  

                     *  इन्होने  माखनलाल चतुर्वेदी की पत्रिका "कर्मवीर " का सम्पादन किया।  इनकी प्रमुख रचना "हॉलैंड के स्वाधीनता  का इतिहास "है।   


           

 

 

7.     ई. राघवेंद्रराव 

                   *  इनका जन्म 4 अगस्त ,1889  में कामठी नागपुर में हुआ।  वे असहयोग आंदोलन में छत्तीसगढ़ के प्रमुख  नेता थे।  

                      *  वर्ष 1926  में इन्होने मुख्यमंत्री के रूप में तथा  वर्ष 1936 में अस्थायी रूप से  मध्य प्रान्त के गवर्नर के रूप  में भी कार्य किया।  वर्ष 1941 में वे वायसराय  की कार्यकारिणी में मनोनीत  होने वाले छत्तीसगढ़ के एकमात्र सदस्य थे।  

                    *     15 जून ,1942 को नई दिल्ली में इनका निधन हो गया।  

 

8.     ठाकुर प्यारेलाल सिंह 

                     *  इनका जन्म 21 दिसंबर ,1891  में दैहान राजनांदगांव में हुआ था।  छत्तीसगढ़ में श्रमिक आंदोलन का सूत्रपात  कर राजनांदगांव  में उन्होंने मजदूरों की 36 दिनों की लम्बी सफल हड़ताल कराई।  

 

                 *  ठाकुर प्यारेलाल सिंह  असहयोग आंदोलन में पूर्ण सक्रिय रहे।  

                  *     वे छत्तीसगढ़  में सहकारिता   आंदोलन के जनक थे।  इस क्षेत्र के बुनकरों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए उन्होंने वर्ष 1945 में छत्तीसगढ़  में भूदान  आंदोलन की कमान सम्हाली थी।  

                      *    छत्तीसगढ़ की रियायतों का विलीनीकरण उनके प्रयास एवं सहयोग के द्वारा ही सरदार पटेल ने सम्भव किया।  20 अक्टूबर ,1954 को इनका देहांत हो गया।  

 

 

 

 

9.    यति  यतनलाल 

                *  इनका जन्म 1894 ई.  को बीकानेर में हुआ था , लेकिन इनकी शिक्षा -दीक्षा रायपुर  में हुई थी।  वर्ष 1930 के आंदोलन में यति यतनलाल ने प्रचार का कार्य किया।  

 

                   *     इन्हे छत्तीसगढ़ में अहिंसा का अग्रदूत कहा जाता है।  इन्होने महासमुंद में विवेक वर्धन आश्रम की स्थापना की थी।   

                        * इनके  तथा शंकरराव गनौदवाले  के नेतृत्व में महासमुंद तहसील  में जंगल  सत्याग्रह आंदोलन हुआ।  

                        *  छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इनके नाम पर अहिंसा पुरस्कार वितरण करती है।  19 जुलाई ,1976 को इनका देहांत हो गया।   

 

 

10.     खूबचंद बघेल 

                    *   इनका जन्म 19  जुलाई ,1900 में रायपुर जिले के पथरी ग्राम में हुआ था।  

                        *  बघेल  ने वर्ष 1920 में कांग्रेस के नागपुर  में आयोजित 35 वे अधिवेशन में चिकित्सा  शिविर में वालण्टियर (कार्यकर्ता ) के रूप में कार्य किया था। 

                        *  वर्ष 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन  में इन्होने स्वयंसेवको के कमांडर  के रूप में कार्य किया।  

                        *    वर्ष 1950 में आचार्य कृपलानी के आह्यन  पर ये कृषक मजदूर पार्टी में शामिल हो गए।  

                       *  वर्ष 1951 में आम चुनाव में ये  विधानसभा के लिए पार्टी  से निर्वाचित हुए।  

                        *  वर्ष 1965  में ये राज्यसभा के लिए चुने गए।  22  फरवरी,1969 को इनका निधन हो गया। 

 

 

 

11.    ठाकुर  रामप्रसाद  पोटाई 

                      *   इनका जन्म कांकेर जिले के करमोती  गांव में वर्ष 1904 में हुआ था।  इन्होने छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई।  

                       *  वर्ष 1942 -46 के मध्य इन्होने कांकेर ,नरहपुर  तथा भानुप्रतापपुर  में युवको के साथ गांधीवादी   राष्ट्रीय  वाचनालय तथा खद्दर  प्रचारक क्लब की स्थापना करके राष्ट्रवादी गतिविधियों का संचालन किया।   

                       *  वर्ष 1946 में वे संविधान सभा में कांकेर से चयनित हुए।  

                       *   वर्ष  1947 में कांकेर स्टेट कांकेर का गठन हुआ ,जिसके अध्यक्ष रामप्रसाद  पोटाई  बने।  

                         *  इन्होने जनजातियों  एवं गैर - जनजातीय कृषको  व  खेतिहरों को सामाजिक एवं राष्ट्र सेवा में समर्पित होने हेतु  प्रेरित किया।  वर्ष 1976 में उनका निधन हो गया।    

 

 

12.    राधाबाई 

                       *  इनका जन्म नागपुर में हुआ था।  नौ  वर्ष की अल्पायु में ही विधवा होने के पश्चात इन्होने  अपना सारा जीवन सामाजिक कार्य में लगाया।  वे पेशे से दाई का काम करती थी ,किन्तु रायपुर के लोगो में डॉ. के रूप में जानी जाती थी।  

                           *  सविनय   अवज्ञा  आंदोलन ,स्वराज  आंदोलन  के दौरान ये गिरफ्तार भी हुई।  2  जनवरी ,1950  को इनका निधन  हो  गया।  

            

 

 

 




















       

   

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